Book Details
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Title |
Kalavali narpatu -Hindi Translation |
Translator |
Dr. P. K. Balasubrahmanyan |
Publisher |
Chennai: Central Institute of Classical Tamil |
Publish Year |
2024 |
Language |
Hindi |
Book ISBN |
978-81-975952-3-3 |
Number of Pages |
60 |
Book Price |
Rs.150.00 |
About the Book:- |
कळवक़ि नाट्टु (रणक्षेत्र चालीस) कळवकि नार्यदु क्षेत्र विशेष का वर्णन करता है। साधारण तौर पर दो क्षेत्रों का वर्णन तमिळ साहित्य में मिलता है। एक है कृषि क्षेत्र और दूसरा है युद्ध क्षेत्र। प्रस्तुत ग्रंथ का वर्ण्य क्षेत्र रणभूमि है, इसके रचयिता हैं पीठीयार्। नाम से स्पष्ट होता है कि इनका मौलिक नाम पोयीयार् नहीं है। कहा जाता है कि वे तोंडि नामक शहर के हैं। इन्होंने चेर राजा के बारे में लिखा है। इसलिए इन्हें चेर राज्य के मानें तो गलत नहीं होगा। कहा जाता है कि पौय्गैयार का कळवक्रि नार्यदु सुनकर चोल राजा चेङ्गणात् ने चेर राजा इसे पोरै को कारागार से मुक्त किया। कल्लातान् ऊरुङ् कलिमाप् परिप्पित्ता अल्लातात् चोल्लुम् उरैयित् पयत्तित्ता इल्लातार्वाय्व चोल्लित् नयमित्ता आङ्कित्ता कल्लातान् कोट्टि कोळल्। सवार न जाने हो अश्वारूव होगा अनर्थ अपड़ कहे शब्द होगा वह अर्थ संपत्ति बिहीन कहे सरस शब्द होगा बह अनर्थ विद्वत्सभा में बोले अपन होगा वह अनर्थ। |