Book Details

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Title

Tinaimoli Aimpatu -Hindi Translation

Translator

Dr. P. K. Balasubrahmanyan

Publisher

Chennai: Central Institute of Classical Tamil

Publish Year

2024

Language

Hindi

Book ISBN

978-81-975952-9-5

Number of Pages

72

Book Price

Rs.150.00

About the Book:-

तिणैमोळि ऐम्बदु (तिणैमोळि पचास)

तमिळ प्रदेश पाँच भागों में विभाजित हैं जो 'तिणै' कहे जाते हैं। प्रस्तुत ग्रंथ में उन पाँचों के प्रत्येक के दस-दस पदों के हिसाब से पचास पद्म प्रदत्त हैं। वैसे तिर्ण संबंधी कई ग्रंथ हैं। पर प्रस्तुत ग्रंथ का, पाँचों प्रदेशों का, जो क्रम बना है वह अवश्य स्तुत्य है।

पहले कुरिद्धि तिर्ण के पद्म हैं। वहीं पहले-पहल प्रेमी-प्रेमिका (नायक-नायिका)। उनमें प्यार अंकुरित होगा और निश्वय कर लेंगे कि हम वर-वधू बनेंगे।

दूसरा है पालै तिर्ण (मरुभूमि)। इसमें प्रेमी अपनी प्रेमिका से बिछुड़कर जाने का प्रसंग है। वह विवाह करने के पहले या बाद में धनार्जन के लिए प्रदेश जाएगा। वह उसे यानी प्रेमिका को उसके माता-पिता की नज़रों से बचाकर ले जाएगा। (नायक के साथ नायिका पलायन करेगी। इस तरह वियोग श्रृंगार (बिरह) को प्रतिपादित करना पानै तिर्ण में प्रसंग है। तीसरा है मुल्नै तिणै (बन-वनांतर)। प्रस्तुत भाग में प्रेमी के वियुक्त होने पर जो विरह-दुख होता है उसे प्रेमिका सह लेगी। उसकी एकनिष्ठता अवश्य मार्मिक होगी। अपने मन में जितनी ही वेदना उभर पड़े उसपर संयम बरतकर प्रेमी के लौटने की प्रतीक्षा आदर्श प्रेमिका की तरह करेगी। प्रस्तुत विषय का वर्णन करना ही मुल्लै के पद्यों का आशय।

चौथा तिर्ण है मरुदम्। इसमें गृहस्थी जो प्रेमी-प्रेमिका चलाते है, उनमें जो रूठना-मनाना चलता है, उसका चित्रण हुआ है। इस ग्रंथ में प्रेम प्रसंगों के मध्य चलनेवाले उपालंभों का उद्घाटन किया गया है।

पाँचवाँ है नेय्दल् तिणै (समुद्र व समुद्रतटीय प्रदेश)। प्रेमी के बिछुड़ने पर प्रेमिका विरहजन्य पीड़ा का अनुभव कर, अपनी वेदना प्रकट करती है।

उपर्युक्त ये सब, तिर्ण आचरण कहलाएँगे। इन सबको, सार रूप में कहना है तो वे हैं, मिलन, विरह मिलन बिछुड़न, अस्तित्व, रूठना-मानना और तरसना।